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बचपन की याद

                
                                                         
                            काश हम भी बच्चा हो जाते ।
                                                                 
                            
दुनिया की उलझनों से दूर ,
मां के साथ में खिलखिलाते
चुपचाप उनकी गोद में सिर रखकर सो जाते ।
काश हम भी बच्चा हो जाते।

बाबा के साथ मेला देखने जाते ।
बड़ी - बड़ी दुकानें देख के ललचाते,
सब कुछ खा पीकर इधर उधर घुमघाम कर
हाथ में बांसुरी और गुब्बारा लिए वापस आते।
काश हम भी बच्चा हो जाते।

पापा के साथ खाना खाते
साथ में अपनी सारी दिक्कत बताते,
पापा जादू की छड़ी घुमाते
और सारी समस्या का हल समझाते।
काश हम भी बच्चा हो जाते ।

भाई - बहन भी लाड लड़ाते।
बुआ और मौसी को खूब दौड़ाते,
दादी - नानी की कहानी सुनकर
सपनों में खो जाते।
काश हम भी बच्चा हो जाते।

चाचा और मामा के कंधों पर बैठकर
पूरा गांव ,मोहल्ला घूम आते,
टॉफी ,बिस्कुट और चॉकलेट के लिए मचल जाते
चांद - तारे दिखा वो मेरा दिल बहलाते ।
काश हम भी बच्चा हो जाते ।

जिंदगी की कश्मकश में कब बड़े हो गए।
सब कुछ छोड़ कर सपनों के आगे खड़े हो गए।
यार ,दोस्त और रिश्ते पीछे छूट जाते ।
अकेले बैठे - बैठे कभी - कभी वो दिन बहुत याद आते
कि काश हम भी बच्चा हो जाते।
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2 घंटे पहले

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