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शोर-ओ-गुल

                
                                                         
                            तूफ़ान को आने की इतनी भी जल्दी क्या है,
                                                                 
                            
बस्ती बसी भी नहीं है ये शोर-ओ-गुल क्या है
दो घूंट शराब के गले से अभी उतरे नहीं साक़ी,
ये मैख़ाने को ताला लगाने का ज़िक्र क्या है?

 
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एक दिन पहले

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