राजस्थान की धरती पर,
शौर्य का एक नाम खड़ा है,
पत्थरों में भी जो बोले,
वो चित्तौड़गढ़ किला खड़ा है।
हर दीवार कहती कहानी,
वीरों के बलिदान की,
रानी पद्मिनी की ज्वाला,
मर्यादा और सम्मान की।
रतन सिंह का साहस आज भी,
हवाओं में गूंजता है,
देशभक्ति और स्वाभिमान का,
संदेश हर दिल तक पहुंचता है।
जौहर की अग्नि साक्षी बनी,
नारी के अदम्य अभिमान की,
मिट गए प्राण पर झुकी नहीं,
माटी इस हिंदुस्तान की।
सूरज ढलता किले पर जब,
इतिहास सजीव हो जाता है,
चित्तौड़गढ़ की वीर गाथा,
हर युग में अमर हो जाता है।
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