रात सुबह की ओर चल पड़ी थी
नींद उसकी आँखों में भी नहीं थी
और मेरी आँखों में भी नहीं
फर्क बस इतना था
कि मुझे उसका इंतज़ार था
और उसका किसी और से करार था…
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