जब थामी हुई कलम तुम्हारी,
अभय राइफ़ल बन जाए,
साधारण-सी कमीज़ तुम्हारी,
गौरवमयी वर्दी कहलाए।
जब कोमल से जूते तजकर,
भारी बूट तुम पहनोगे,
जब शिक्षक को तज,
प्रशिक्षक के अनुशासन में रहोगे।
जब यार-दोस्त सब पीछे छूटें,
और रण का साथी मिल जाए,
जब सगी जननी की ममता भी,
मातृभूमि में मिल जाए।
समझो उस पल, उस पावन दिन,
तुम नया इतिहास रचोगे,
ओ भारत माँ के लाडले!
तब तुम 'सैनिक' बन जाओगे।
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