ख़ता में सज़ा नहीं, प्यार देना चाहिए,
टूटते हौसलों को थोड़ा सहारा देना चाहिए।
इंसान ही तो है, पत्थर नहीं कोई,
गिर जाए जो राह में, उसे उठाना चाहिए।
नफ़रत से ज़ख़्म गहरे हो जाते हैं,
मोहब्बत से हर दर्द का इलाज़ होता है।
गलती पर अगर गले लगा लिया जाए,
तो वहीं से इंसान का नया आग़ाज़ होता है....!!!
-संजय श्रीवास्तव
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