"पनाह चाहे नज़रों में हो या दिल में,
एक ठिकाना मेरा भी हक़ बनता है।
यूँ ही नहीं बिताए हैं हमने तेरे ख़यालों में दिन-रात,
तेरी मोहब्बत में एक आशियाना मेरा भी बनता है।"
-संजय श्रीवास्तव
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