मिट्टी पर जो वादे लिखे थे कभी,
और सपनों के घरौंदे भी बनाए थे,
शायद तुम यह भूल गए कि
मिट्टी कच्ची होती है।
वह कब तक संभाले रखेगी
वादों की इबारत और उम्मीदों के महल को?
एक दिन बारिश, हवा या वक्त की ठोकर से
सब कुछ बिखर ही जाता है।
कुछ नहीं बचता शेष
सब नष्ट हो ही जाता है....
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