आज फिर
किसी देश ने जीत का ऐलान किया,
और लोगों ने
स्टेटस लगा दिया—
“Proud moment 🇮🇳”
पर उसी वक़्त
किसी माँ का फोन
अब भी ring हो रहा है,
जिसे कोई उठाने वाला नहीं।
हमने युद्ध
अब मैदान में नहीं,
स्क्रीन पर देखना सीख लिया है—
जहाँ
मरने वालों की संख्या
बस एक number होती है।
“Collateral damage”—
कितना आसान शब्द है,
जिसमें
किसी का पूरा घर
एक लाइन में सिमट जाता है।
यहाँ लोग
ट्वीट से तलवार चलाते हैं,
और कमेंट में
देशभक्ति साबित करते हैं।
कोई नहीं पूछता—
वो लड़का
जो गया था “देश के लिए”,
वो लौटेगा
किसके लिए?
विजय के बाद
यहाँ भी वही सन्नाटा है—
बस फर्क इतना है
कि अब
शंख नहीं बजते,
नोटिफिकेशन आते हैं।
और सच तो ये है—
हम सब
थोड़ा-थोड़ा
कुरुक्षेत्र में हैं,
बस हमें
खून नहीं दिखता,
क्योंकि वो
स्क्रीन के उस पार है।
और हम—
उसे देखते हैं,
एक सेकंड रुकते हैं…
फिर
स्क्रोल कर देते हैं।
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