उम्र के आखिर में दोस्त संभाल रखना
यादों के कारवां में जो ग़म-ख़्वार हो ले
नासेह बहुत मिलेंगे " हलदौना " इस दौरे दुनिया में
कोई चारासाज़ रखो जो ग़म-गुसार हो ले
शैलेंद्र शुक्ला" हलदौना "
ग़म-ख़्वार~ दुख दर्द बांटने वाले,
बात को सुनने वाले ,
नासेह ~ सिर्फ सलाह और एडवाइस देने वाले
चारासाज ~ मुसीबत में साथ देने वाले
हैं दोस्त नासेह
ग़म-गुसार ~दुख दर्द बांटने वाले,
बात को सुनने वाले ,
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