मृत्यु! एक अटल सत्य है,
जिसे मेट सके न कोय,
चाहे जितना चाह लो
पर उसका खेल सटीक।
जिसके साथ जीने का
वादा लियो कराए,
वो कितने दिन ठहरेगा,
ये केहू का नाय पता।
न बच्चा न बूढ़ा देखे
ये मौत की सवारी,
सपने देखो कितने भी
ये नहीं किसी की आभारी।
कर्म अच्छे कर लियो
बस वही साथ में जाई
बाकी धन, दौलत और रिश्तेदारी
सब यही पर रह जाई।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X