जीवन में ऊपर उठना है, तो तन-मन हल्का करना होगा।
इर्ष्या-द्वेष से भरे हृदय को, पूर्णतः खाली करना होगा।
जो उलझे रहे संकीर्ण विचारों में, तो फिर यह तय है,
सूनी आँखों से सूने नभ को, बस तकते रहना होगा।
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