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देशभक्ति शायरी

                
                                                         
                            तुम चलो काकोरी करने मै साथ तुम्हारे जाऊंगा
                                                                 
                            
जो पड़ी जरूरत मा को तो मैं बलिदान भी देकर आऊंगा
तुम बेशक गा सकते हो गजल अपने महबूब की
मै तो देश की वीरों की बलिदान कहानी गाऊंगा

जिस बगिया में फूल दिखा ये बस वही पे आते जाते है
शायद अब के हनुमानो को जामवंत नहीं मिल पाते है
जो हुआ घोटाला उस पर ये सवाल नहीं कर पाते हैं और
अमर हुए जो देश के खातिर उन वीरों पर इनको बस दाग लगाने आते हैं

एक मां भारती का वीर कइयों पे भारी पड़ जाते हैं
जिनसे पाला पड़ जाने पर दुश्मन के होश तलक उड़ जाते हैं
जो मां भारती को याद करके अंगद सा पैर जमाते है
जो टिफिनो को एंटी टैंक किए वो भारत के वीर मेजर चांदपूरी कहलाते हैं

भारत के आगामी पीढ़ी को हमने ये पैगाम लिखा है
तन भले ही कैद हुआ है पर मन में हमने राम लिखा है
सांस रुके या सर कलम हुआ है कभी नहीं इस्लाम लिखा है
अपनी अंतिम श्वास में भी हमने भारत को जिंदाबाद लिखा है

जो हुआ धमाका पोखरण में उसका शोर दुनिया को सुनाई देता है
जो तनी रही गोरे के सम्मुख वो आजाद के मूंछों का अब शान दिखाई देता है
जो रंग दे बसंती गाता हो उस भगत सिंह के खामोशी में भी शोर सुनाई देता है
जब भारत के वीर रण में आते है तो बस केवल जयहिंद का।जयघोष सुनाई देता है
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एक दिन पहले

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