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खाली रूह..

                
                                                         
                            सूखे हुए शज़र पे
                                                                 
                            
बहारें नहीं आती,
दिल हो टूटा हुआ गर, तो
उसमें फिर उल्फ़त नहीं
आती...,

तन्हाई में भी उठता है
भीतर में कोई शोर..
जब रूह ही हो खाली, तो
फ़िर
जिंदगानी नहीं आती..।।।
- सोनिया"सौरवी"
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18 घंटे पहले

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