गाँव की राहों में चलता, सेवा का रखता ध्यान,
राशन लेकर आता सबको, यही उसका सम्मान।
गेहूँ, चावल, चीनी देकर, घर-घर खुशियाँ बाँटे,
जरूरतमंदों के चेहरे पर, आशा के दीपक छाँटे।
धूप पड़े या बरसे पानी, करता अपना काम,
जनसेवा के इस पथ पर, कमाता सच्चा नाम।
ईमानदारी संग जो बाँटे, जनता का अधिकार,
उस कोटेदार की मेहनत का, होता है सत्कार।
राशन की हर एक बोरी में, जनता का विश्वास,
सेवा, श्रम और जिम्मेदारी, यही उसकी खास।
- सूरज पालोदिया
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X