मैं तुम्हें ,
क्या?
भेंट चढ़ाऊँ - -
क्योंकि ?
खुद हो ,
जगत के दाता - -
सारे जगत को ,
देने वाले - -
सचमुच ,
क्या ?
मैं भेंट - -
चढ़ाऊँ l
जिनके ,
नाम से ही - -
या नाम,
लेते ही - -
खुशबू आए ,
भला उसे - -
कैसे ?
फूल चढ़ाऊँ l
जो सचमुच ,
जगत के - -
तारणहार है ,
भला उसे - -
हम कैसे,
तैर कर दिखाऊँ - -
हकीकत में,
जिनको - -
खुद पर गुमान था,
वो - -
तैरते -तैरते ,
डूब गए - -
वहीं जिनपर ,
आप (ईश्वर )मेहरवान थे - -
और वो,
डूबते - डूबते - -
तर (बच )गये l
-सुरेश कुमार झा 'अल्हर'
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X