किसी ने ,
सच ही - -
कहा है कि ,
वास्तव में - -
यह जिंदगी ,
सवालों का - -
समंदर ही तो है l
यहाँ पर ,
हर सवाल का - -
जवाब - -
आसानो से ,
नहीं मिल पता है - -
इसलिए ,
हर ख्वाब - -
अधूरा रह जाता है l
भटकना पड़ता है ,
राहों में - -
कई बार ,
फिर भी - -
खाहिशों का ,
सिलसिला - -
कम नहीं होता,
या यों कहे - -
ख्वाहिश हमेशा,
बढ़ता ही - -
रहता है l
जब तक ,
हमारा लक्ष या - -
मंजिल ,
दिखता नहीं - -
हर सीख या,
तजुर्बा का - -
का कीमत होता है l
अंत में ,
इतना ही - -
कहना है कि,
यह सीख या - -
तजुर्बा भी ,
हमें मुफ्त में - -
नहीं मिल पाता है l
-सुरेश कुमार झा 'अल्हर'
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