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परवाह (ध्यान )करने वाले को ही भूल जाते हैं

                
                                                         
                            अक़्सर हाँ ,
                                                                 
                            
जो बिल्कुल - -
खास होते हैं ,
उन्हीं को - -
को हम ,
नजरअंदाज - -
करने लगते हैं l

सचमुच ,
यह एक - -
कड़वा सच के,
सामान है - -
हम उन्हीं को,
नजरअंदाज - -
दुःखी करते हैं,
या यों कहें - -
रुलाते,
जो हमारा - -
विशेष ,
ध्यान रखते हैं - -
हकीकत में,
सबसे खास - -
माता - पिता,
और - -
पत्नी ही
हो सकते हैं l

हम उनके लिए,
रोते हैं - -
या दुःखी होते हैं - -
जो सच में ,
हमारे परवाह - -
करते ही,
नहीं करते l

हम उनका परवाह,
करते हैं - -
जो हमारे लिए,
न रोयेंगे - -
ना ही दुःखी,
हो सकते हैं - -
या परवाह भी ,
नहीं कर सकते हैं l
-सुरेश कुमार झा 'अल्हर'
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3 दिन पहले

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