सच में ,
यदि जीवन में - -
सुख मिलेगा तो,
दुःख भी - -
मिलेगा ,
कहा भी - -
गया है कि ,
सुख - दुःख के - -
मधुर मिलन से,
ये जीवन - -
होता है ,
परिपूरण l
हकीकत में ,
सुख - दुःख की - -
वहार ,
यही है - -
जीवन का सार l
जीवन के हर मोड़ पे ,
कुछ न कुछ - -
सिखने को ,
मिलते हैं - -
जिससे हमें,
जीने का - -
शलीका या,
तजुर्बा आ जाता है - -
और वक़्त का,
असली उपहार भी - -
यही है l
यह संसार ,
हर पल - -
बदलता रहता है,
मानो तो - -
जीवन में ,
सुख के समान - -
छाँव आता है ,
या रहता है - -
तो अहसानिये,
धूप (दुःख ) के थपेरों का - -
सामना करना,
पड़ता है l
अंत में ,
जो गिरकर भी - -
संभलना सीख लिया ,
मानो वह - -
जीवन का ,
आधार सीख लिया l
-सुरेश कुमार झा 'अल्हर'
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