मुझसे कई बार मैं होकर गुजरी
मैंने कहा कौन हो तुम
उसने जबाव दिया तुम कौन हो
मैंने कहा फलां है मेरा नाम
उसने कहा झूठ बोल रही हो
कुछ रस्ते थे टेढ़े मेढ़े
मैं उन रस्तों होकर गुजरी
मुझसे कई बार मैं होकर गुजरी
उसने कहा-
परत-दर-परत जो ओढ़ा तुमने
क्या वो है तुम्हारा सच
मैंने पूछा-
क्या है फिर पूरा सच
कहाँ मिलेगी हकीकत
टेढ़े-मेढ़े रस्तों पर
जहाँ तुम थककर बैठी हो
उन रास्तों के एहसासों में
एक गहरी खामोशी रहती है
वो कहानी क्या है- पूरी
खुद जानो और पहचानो
-शिवानी यादव
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