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टुकड़ों में मोहब्बत

                
                                                         
                            कभी अनजाने में जो टकरा जाऊँ,
                                                                 
                            
नज़रे मत टकराने देना,
कभी आवाज़ दूँ जो मुड़कर पीछे,
तुम आवाज़ पीछे मुड़कर सुन मत लेना,
कभी इंतज़ार करते-करते कोई याद आ जाए,
तो याद कर लेना, ये गुमान न करना,
कि वह शख्स भी लौट आएगा,
जो टुकड़े-टुकड़े हो चुका,
मोहब्बत में तुम्हारी।

 
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एक घंटा पहले

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