प्रेम दामन पे कई दाग़ भी लगवाता है
तू इसी डर से मेरे शहर नहीं आता है
मुझसे मिलने उसी नगरी में चले आना तुम
तीन धाराओं का संगम जहाँ हो जाता है
— त्रिशिका धरा
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