मेरे सच में झूठ की परछाई उसे दिखती।
तेज हवाओं में ठहराव की रवानी दिखती।।
रोशनी में रहना नही भाता महबूबा ऐसी।
अंधेरों में राज चाहती खामोशी में सुनती।।
फिर भी दिल कहता उसकी बाते अनमोल।
हार के सबक में भी जीत बिंदास दिखती।।
बिछुड़ने पर भरोसा नही तन्हाई चुन लेती।
साथ छोड़ने का विकल्प कभी नही चुनती।।
जिन्दगी में 'उपदेश' मोड़ अवश्य ही आते।
एहसास सम्हाले रखती नैनो में नमी रखती।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
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