कॉकरोचो ने सरकार के सीने पर मूंग दली।
होले दिखी सत्ता के माथे पर सिलवटें भली।।
कोई सवाल कर देखे बदहाली पीछा करेगी।
कोशिश इधर हुई मगर दिखी उधर खलबली।।
उनका मुक़ाम खास मलकर रख दिया गया।
मुँह छिपाए फिर रहे सत्ता की हालत पतली।।
जिनका दिल पत्थर उनका पत्थर ही रहेगा।
दुखती रग को छूते ही किस्सों की बाढ़ चली।।
गलती किसीकी भी बख्शी न जाएगी 'उपदेश'।
जेन-जी के फरमान ने उड़ाई फ़ूलों की तितली।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
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