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नई दास्तान

                
                                                         
                            कल से फिर लिखी जाएगी एक नई दास्तान।
                                                                 
                            
कॅलेंडर की तारीख पुरानी होने वाली मेरी जान।।

पर सुनो मुझे बस तुम्हारा पुराना साथ चाहिए।
सालो साल खत्म ना हो प्यार का एहसास जान।।

दे सकोगे अगर तुम कुछ सुनहरी यादे मुझको।
संग बिताए पलो की कुछ निशानी दो मेरी जान।।

हर सफर में मेरे साथ रहोगे ऐसा इक वादा करो।
अल्फाजों में बयाँ कर सकूँ 'उपदेश' मेरी जान।।

तेरी डायरी के पन्ने पर सिर्फ हमारा ही जिक्र हो।
जब भी खोल कर देखूँ तबियत मचले मेरी जान।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
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एक घंटा पहले

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