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शुक्रिया तो कहो

                
                                                         
                            तुम्हारी याद लहर बनकर
                                                                 
                            
चढ़ती और उतरती
आँखें टकटकी लगाए
अब बिल्कुल नही भटकती

जिस पतझड़ में तुम खिली
उसे शुक्रिया तो कहो
जो आया गया सा रहा
उसे ईश्वर पर छोड़ दो

कुछ ख्वाब आज भी अधूरे
सुकून की जननी जैसे
नींद में पूरा होने के लिए
कम से कम इजाज़त दे दो

मेरी चालाकियां उससे कम
फिर भी मोहब्बत जिंदा
आराम से देखती नजरे 'उपदेश'
उनको तन्हा ही रहने दो
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
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2 घंटे पहले

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