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सुकून की राह

                
                                                         
                            बेईमानी की राह बड़ी आसान,
                                                                 
                            
न कोई मेहनत, न कोई अरमान।
झूठ के सहारे मंज़िल मिल जाए,
पर दिल का आईना खुद से घबराए।

थोड़ी सी चमक, थोड़ी सी शान,
पर भीतर रहता खाली जहान।
हाथों में दौलत, चेहरे पर हंसी,
पर नींद चुराए हर रात की घड़ी।

ईमानदारी का रास्ता कठिन सही,
हर कदम पर परीक्षा, हर मोड़ नई।
कभी हार, कभी इंतज़ार का दर्द,
पर दिल में रहता सच्चाई का गर्द।

न कोई डर, न कोई पर्दा,
खुद से नज़रें मिलाना है सरल सा।
थोड़ा कम मिले, पर सुकून भरपूर,
सच की रोशनी में जीवन है नूर।

जब भी जीवन दो राह दिखाए,
एक आसान, एक सच्चा बुलाए,
याद रखना ये छोटा सा ज्ञान—
सुकून बसता है ईमान के स्थान।

बेईमानी दे सकती है पल दो पल की खुशी,
पर ईमानदारी देती है उम्र भर की हंसी।
-ऊषा शुक्ला
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
52 मिनट पहले

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