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एक दिन: युवा

                
                                                         
                            जिस दिन कॉलेज और यूनिवर्सिटी के मंचों पर
                                                                 
                            
छात्र संघ अध्यक्ष कौन बनेगा, कि जगह भारत के लिए क्या बनाओगे कि चर्चा होगी।

जिस दिन चौक चौराहों पर नौजवान कि भीड़
भौकाल मारपीट और सत्ता कि बगावत के लिए नहीं,
बल्कि नई सोच विचार और बड़े सपनों के लिए जमा होगी।

जिस दिन गली मोहल्लों में गैंग डर फैलाने के लिए नहीं
बल्कि तकनीक कि खोज, सामुहिक रोजगार ओर समाज निर्माण के लिए बनेगा।

जिस दिन परीक्षा में टॉपर
सरकारी नौकरी के कोचिंग के बजाय
देश के लिए नया आविष्कार करने का संकल्प लेगा।

उस दिन भारत का भविष्य केवल लिखा नहीं जाएगा ,
वो उकेरा जाएगा उगाया जाएगा।

वो दिन भारत कि असली आजादी का दिन होगा ,
जब युवा सत्ता नहीं, समाज का निर्माण मांगेगा।

तब हथियार नहीं,
विज्ञान ओर विचार से लड़ाई जीती जाएगी।

वह दिन जब होगा ,

राजनीति सत्तालोलुप नहीं समाधानपरक बनेगा,
गैंग तोड़ने का मंच नहीं जोड़ने का मंच बनेगा ,
संघर्ष कुर्सी कि नहीं क्रांति कि दिशा में होगी,
नेता भीड़ नही क्रांति को दिशा देगा,
युवा झंडा नहीं विचार उठाएगा,

हम भारत के वो युवा हैं।

जिन्हे सिर्फ पढ़ाया नहीं जाना चाहिए सुनाया , समझाया और स्वतंत्र उड़ने दिया जाना चाहिए।
- विश्व उदयजीत
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2 घंटे पहले

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