आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

नया साल

                
                                                         
                            आगे की दुनियां में बढ़ रहा हूँ मैं।
                                                                 
                            
पीछे बोहोत कुछ छोड़ रहा हूँ मैं।
नया सवेरा, नई रात।
के लिए तत्पर तैयारी कर रहा हूँ मैं।
हो गया प्यार, होगयी मोहब्बत,
अब ज़मीन से ज़मीन नाप रहा हूँ मैं।
अब क़यामत लिख रहा हूँ मैं।
होगया रोना, धोना, होगया पूरा पश्चाताप।
अब नई आँखें ख़ुदा से मांग रहा हूँ मैं।
नए साल की पूरी तरह से तैयारी कर रहा हूँ मैं।
मैंने देखी थी मौत, पर अब ज़िंदगी देख रहा हूँ मैं।
जिन्दगी जी रहा हूँ मैं, कल को कल से तोड़ रहा हूँ मैं।
होगया हूँ बड़ा, अब जिम्मेदारियां संभाल रहा हूँ मैं।
चलो ये समुंदर भी अब पार कर रहा हूँ मैं।
एक जिम्मेदार व्यक्ति बन रहा हूँ मैं।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक घंटा पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर