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सफ़र लंबा है तुम्हारा

                
                                                         
                            किसी को पाने की ज़िद्द करना अच्छी बात नहीं।
                                                                 
                            
जो ना हो नसीब में।
उसे वहीं छोड़ आगे बढ़ने में समझदारी है।
मैं चाहता हूँ उसे।
ये कहने से पहले।
खुदसे मोहब्बत करना जरूरी है।
किसी के लिए जान देना तो ठीक है मग़र।
जान लेने की बारी आए।
तो समझ लेना जवानी है।
मेरी कविता बगैर कहानी है।
हो जाए दोस्ती, उसे मोहब्बत ना समझने में ही समझदारी है।
दिल टूट जाए तो जुड़ जाता है मग़र।
क्या जवानी ऐसे फ़िज़ूल बातों पर गवानी है?
कुछ मक़सद ले कर चलो ए नौजवानों।
सफ़र लंबा है तुम्हारा, कहानी और लिखनी अभी बाकी है।
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एक घंटा पहले

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