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एकाकी राह

                
                                                         
                            चलो अच्छा ही हुआ
                                                                 
                            
तुम ने ठुकरा दिया मेरा प्रेम,
यूं भी तुम्हे प्रेम करना
दिल की नादानी थी, कि
मुझे मालूम है
आगे की राह पे मुझे
एकाकी ही जाना है,
क्यूं कि यही मेरा लक्ष्य है,
और तुम्हे सोता हुआ छोड़ के
जाने का इल्ज़ाम तो न लगेगा।
चलो अच्छा ही हुआ
दिल इस बात से तो
विचलित नहीं होगा
कि कोई आंखे मेरे लिए रोती होगी,
किसी को मेरे लौट के आने प्रतीक्षा होगी।
सच मानो, इक असीम सकून है
इस ठुकराए जाने में
क्यूं कि
मेरी राह एकाकी हैं।
-नीरू जैन
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 महीने पहले

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