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खुशी के फूल खिलेंगे

                
                                                         
                            अमन शान्ति के बीज बोयेंगे
                                                                 
                            
प्रेम की फसल लहलहाएगी,
खुशी के फूल खिलेंगे तो
कायनात भी महक जायेगी।

वफ़ा की चाहत दिल में होगी तो
दुश्मनी भी घबराएगी
हम दीप बन जल लेंगे तो
अंधेरों की हस्ती भी सिहर जायेगी।

दोषारोपण करने से पहले
निज मन के भीतर तो झांके,
मन से मन के द्वेष मेटो तो
विश्व शांति भी आएगी....
- नीरु जैन
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 महीने पहले

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