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मेरे संग चाय की चुस्कियों लेते हुए

                
                                                         
                            अब हर जगह नजर आते हो तुम
                                                                 
                            
कि यूं घुलते जाते हो मुझ में
कभी मेरी कविता की रिक्तियां भरते हुए
कभी मेरे गीतों की पक्तियां बनते हुए
अब हर जगह नजर आते हो तुम....
कभी मेरे संग चाय की चुस्कियों लेते हुए
कभी मेरे कंधे पे सर रख सो जाते हुए
कभी कहते हो इक मुसीबत मुझे, तो
कभी मेरी उलझनों में मशवरा बन जाते हुए
अब हर जगह नजर आते हो तुम....
कभी मेरी उदासी में ख्वाब भर जाते हुए
कभी बिना बात मुस्कुराने का सबब बन जाते हुए
तुम्हारे इन अहसास में निखरी निखरी सी रहती
कि मेरे आइने के हर अक्स में नजर आते हुए
अब हर जगह नजर आते हो तुम...
- नीरू जैन
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3 महीने पहले

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