तेरा साथ याद रहेगा
जो रूह में बसते है,
उनसे क्या दूरी, क्या मुलाक़ात,
पलकें झकाऊं तो दीदार हो जाता,
पलकें उठाऊं तो रूबरू आ बैठते,
जो रूह में बसते है,
उनसे क्या दूरी, क्या मुलाक़ात,
उनके ख्वाबों की संगत भी
बड़ी हसीन,
पलट पलट के मानो
मुझ ही को देखते।
जो रूह में बसते है,
उनसे क्या दूरी, क्या मुलाक़ात...
मैं कहती नही, फिर भी सुन लेते,
हिचकी भी आए तो मेरा नाम लेते,
दिल से दिल के जुड़े हो तार।
उनसे क्या दूरी, क्या मुलाक़ात.....
-नीरू जैन
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