निराशा में भी आशा के द्वार ढूंढ लेंगे,
तुम अंधेरा करोगे,
हम आशाओं के नए ख़्वाब बुन लेंगे
तुम्हे लगता ना,
कि न हमारी हस्ती कोई ,
न कोई पहचान,
पर इक दिन ऐसा आयेगा,
आप ख़ुद हमे ढूंढा करेंगे। डॉ नीरू जैन
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