राह-ए-उल्फत मे गम-ए-फिराक की सौगात मिली हमे।
शब-ए-वस्ल की जुस्तजू मे यूँ हिज्र की रात मिली हमे।।
-यूनुस खान
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X