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रीझते हुए जीवन की चुनौतियों से रूबरू कराता ये नगमा

अकेला चल
                
                                                         
                            तनाव और विनाश के इस दौर में आज हर आदमी अपने आपको अकेला महसूस कर रहा है|  घर परिवार के सदस्यों के साथ रहते हुए भी उसे अपने अकेलेपन का एहसास धीरे धीरे होते जा रहा है | खैर ऐसे माहौल के बीच में आदमी सकारात्मक रहते हुए हिम्मत और साहस से काम ले तो उसे इस अकेलेपन से भी कुछ कर गुजरने की सीख मिल सकती है |  ध्यान और अध्यात्म साधना उसके अंदर असीम ऊर्जा और उत्साह का संचार कर सकती है | और व्यक्ति संकट के इस पल को भी अपने लिए एक अवसर बना सकता है |
                                                                
                
                
                 
                                    
                     
                                             
                                                

मुकेश अपने दर्द भरे नग्मों के लिए जाने जाते हैं

बॉलीवुड में १९६८ में प्रसारित फिल्म सम्बन्ध का गीत चल अकेला चल अकेला ऐसे समय में आदमी को ढेर सारा साहस दे सकता है| प्रदीप के लिखे इस गीत को अजर अमर गायक मुकेश ने अपनी आवाज़ दी है जबकि संगीत से सजाया है ओमप्रकाश नैय्यर साहब ने|  मुकेश अपने दर्द भरे नग्मों के लिए जाने जाते हैं | मुकेश का यह गीत आदमी को उसके अकेलेपन का मतलब बड़ी गहराई से समझा रहा है | 
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मुकेश अपने दर्द भरे नग्मों के लिए जाने जाते हैं

3 वर्ष पहले

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