गुरुदत्त के साइन करने पर लोगों ने कैफ़ी को गीतकार माना

Shayar lyricist kaifi azmi
                
                                                             
                            

एक इंटरव्यू के दौरान कैफ़ी बताते हैं कि कैसे लोगों ने उन्हें गीतकार तब माना जब उन्होंने गुरुदत्त की फ़िल्म साइन की।

कैफ़ी आज़मी उर्दू अदब का एक मक़बूल नाम हैं जिन्होंने अपनी ग़ज़लों में रूमानियत से लेकर औरतों के हक़ों तक को लिखा। लेकिन उनके लेखन का सफ़र इतना आसान नहीं था। सादे से कपड़े पहनने वाले शायर कैफ़ी ने अपने शुरुआती दौर में बहुत बेकारी के दिन देखे थे। उनका जन्म एक छोटे से गांव मिजवां में हुआ था जहां न पानी था न बिजली।

कैफ़ी उसी गांव से निकले और अदब की तरफ़ रुख किया। वह ‘कम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया’ के सदस्य बन गए, जिससे उन्हें कुछ पैसे मिल जाया करते थे। इसी बीच इन्हें शौक़त से मुहब्बत हो गयी। कैफ़ी की बेग़म शौक़त बताती हैं कि उन्हें कैफ़ी की आवाज़ और उनकी शायरी से प्यार हो गया था और उन्होंने उनसे शादी करने की बात तय कर ली। लेकिन उनके परिवार ने इसका विरोध किया क्यूंकि कैफ़ी उस वक़्त बहुत कम कमाया करते थे। लेकिन शौक़त ने कहा कि अगर उन्हें कैफ़ी के साथ मजदूरी भी करनी पड़ी तो वह करेंगी लेकिन वह कैफ़ी से ही शादी करेंगी।

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4 months ago

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