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विभूतिनारायण राय बताते हैं- मैंने परसाई जी को इतना नर्वस कभी नहीं देखा, फ़िराक़ से मिलने के बाद...

Firaq Gorakhpuri
                
                                                         
                            फ़िराक साहब आधुनिक शायरी के आख़िरी शास्त्रीय (क्लासिक) शायर थे लेकिन हैरत है कि  कि प्रेम और सौंदर्य के तीव्र बोध का यह शायर अपने जानने वालों में अपनी शायरी से ज़्यादा अपनी सनक, हेकड़ी और बदमगज़ी के लिये भी जाना जाता है। 
                                                                 
                            

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय, वर्धा  के पूर्व कुलपति और उपन्यासकार विभूतिनारायण राय हैं जिन्होंने बारहा फ़िराक़ को देखा और जाना था।

फ़िराक़ साहब के बंगले के सामने से गुज़रते हुए...

उन्होंने बताया था कि एक बार वे हरिशंकर परसाई के साथ फ़िराक़ साहब के बंगले के सामने से गुज़र रहे थे, तो परसाई जी फ़िराक़ साहब से मिलने को मचल उठे। 

गेट खोलकर जब वे लोग लॉन में पहुँचे तो वहाँ फ़िराक़ साहब हस्बमामूल तरीके से बैठे हुए शराब पी रहे थे। परसाई जी ने हुलसकर अपना परिचय दिया मैं हरिशंकर परसाई हूँ। फ़िराक़ साहब ने अपनी नज़रें तक नहीं उठाई। परसाई जी का आत्मविश्वास जबाब दे रहा था। 
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फ़िराक़ साहब के बंगले के सामने से गुज़रते हुए...

18 घंटे पहले

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