रवीन्द्र जैन और राज कपूर - दोनों ही अपने अपने हुनर के महारथी हैं। उन्हें पहचान के किसी लिबास की ज़रूरत नहीं है। रवीन्द्र जैन की आवाज़ में राम-कथा के गीत घर-घर तक पहुंचे तो राज कपूर ने अपने अभिनय से लोगों को स्पर्श किया। उन दिनों राज कपूर और रवीन्द्र जैन की मुलाक़ात हुई, रवीन्द्र जैन ने एक गीत तैयार किया हुआ था ‘एक राधा और एक मीरा’ - ये गीत सुनते ही राज कपूर को भा गया और उन्होंने रवीन्द्र जैन से इस गीत को अपने लिए मांग लिया। इसके आगे राज कपूर के फ़ार्म हाउस पर लोग जुटते और गीत तैयार होते।
तैयार होते-होते कई गीत उसी शृंखला में तैयार हो गए थे, फिर फ़िल्म की पटकथा पर काम हुआ। जब बात आई लाइन ‘राम तेरी गंगा मैली’ पर तो राज कपूर ने रवीन्द्र जैन से कहा कि वह पहले ही ‘जिस देश में गंगा बहती है’ के नाम से फ़िल्म बना चुके हैं। अगर अब वो ‘राम तेरी गंगा मैली’ के नाम से बनाएंगे तो ये न्यायपूर्ण नहीं होगा। इस पर रवीन्द्र जैन ने इसमें आगे लाइन जोड़ी कि ‘पापियों के पाप धोते-धोते।’
ये बात राज कपूर को जंच गई और इस तरह पूरी फ़िल्म और उसके सुपरहिट गाने तैयार हुए।
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