आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

आज का शब्द: दुरंत और अज्ञेय की कविता 'वसंत आ गया'

aaj ka shabd durant agyeya hindi kavita vasant aa gaya
                
                                                         
                            

हिंदी हैं हम शब्द-शृंखला में आज का शब्द है दुरंत जिसका अर्थ है - 1. अपार 2. बहुत बड़ा या भारी 3. कठिन 4. बहुत गंभीर। कवि अज्ञेय ने अपनी कविता में इस शब्द का प्रयोग किया है। 

मलयज का झोंका बुला गया
खेलते से स्पर्श से
रोम रोम को कंपा गया
जागो जागो
जागो सखि़ वसन्त आ गया जागो

पीपल की सूखी खाल स्निग्ध हो चली
सिरिस ने रेशम से वेणी बाँध ली
नीम के भी बौर में मिठास देख
हँस उठी है कचनार की कली
टेसुओं की आरती सजा के
बन गयी वधू वनस्थली

स्नेह भरे बादलों से
व्योम छा गया
जागो जागो
जागो सखि वसन्त आ गया जागो

चेत उठी ढीली देह में लहू की धार
बेंध गयी मानस को दूर की पुकार
गूंज उठा दिग दिगन्त
चीन्ह के दुरंत वह स्वर बार
"सुनो सखि! सुनो बन्धु!
प्यार ही में यौवन है यौवन में प्यार!"

आज मधुदूत निज
गीत गा गया
जागो जागो
जागो सखि वसन्त आ गया, जागो! 
 

6 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर