आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

हफ़ीज़ बनारसी: मुजरिम हैं अगर हम तो सज़ा क्यूँ नहीं देते 

हफ़ीज़ बनारसी: मुजरिम हैं अगर हम तो सज़ा क्यूँ नहीं देते
                
                                                         
                            क्या जुर्म हमारा है बता क्यूँ नहीं देते 
                                                                 
                            
मुजरिम हैं अगर हम तो सज़ा क्यूँ नहीं देते 

क्या जल्वा-ए-मअ'नी है दिखा क्यूँ नहीं देते 
दीवार-ए-हिजाबात गिरा क्यूँ नहीं देते 

तुम को तो बड़ा नाज़-ए-मसीहाई था यारो 
बीमार है हर शख़्स दवा क्यूँ नहीं देते 

किस दश्त में गुम हो गए अहबाब हमारे 
हम कान लगाए हैं सदा क्यूँ नहीं देते  आगे पढ़ें

4 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर