आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

आज का शब्द: विषम और शंभुनाथ सिंह की कविता- यहाँ राह अपनी बनाने चले हम

आज का शब्द
                
                                                         
                            'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- विषम, जिसका अर्थ है- जो समान या बराबर न हो, (वह संख्या) जो दो से भाग देने पर पूरी तरह न बँट सके। प्रस्तुत है शंभुनाथ सिंह की कविता- यहाँ राह अपनी बनाने चले हम
                                                                 
                            

विषम भूमि नीचे, निठुर व्योम ऊपर !

यहाँ राह अपनी बनाने चले हम,
यहाँ प्यास अपनी बुझाने चले हम,
जहाँ हाथ और पाँव की ज़िन्दगी हो
नई एक दुनिया बसाने चले हम;
विषम भूमि को सम बनाना हमें है
निठुर व्योम को भी झुकाना हमें है;
न अपने लिए, विश्वभर के लिए ही
धरा व्योम को हम रखेंगे उलटकर !

विषम भूमि नीचे, निठुर व्योम ऊपर !
अगम सिन्धु नीचे, प्रलय मेघ ऊपर !

लहर गिरि-शिखर सी उठी आ रही है,
हमें घेर झंझा चली आ रही है,
गरजकर, तड़पकर, बरसकर घटा भी
तरी को हमारे डरा जा रही है
नहीं हम डरेंगे, नहीं हम रुकेंगे,
न मानव कभी भी प्रलय से झुकेंगे
न लंगर गिरेगा, न नौका रुकेगी
रहे तो रहे सिन्धु बन आज अनुचर !

अगम सिन्धु नीचे, प्रलय मेघ ऊपर !
कठिन पंथ नीचे, दुसह अग्नि ऊपर !

बना रक्त से कण्टकों पर निशानी
रहे पंथ पर लिख चरण ये कहानी

बरसती चली जा रही व्योम ज्वाला
तपाते चले जा रहे हम जवानी;
नहीं पर मरेंगे, नहीं पर मिटेंगे
न जब तक यहाँ विश्व नूतन रचेंगे
यही भूख तन में, यही प्यास मन में
करें विश्व सुन्दर, बने विश्व सुन्दर !

कठिन पंथ नीचे, दुसह अग्नि ऊपर !

हमारे यूट्यूब चैनल को Subscribe करें।

16 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर