आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

अंजुम आज़मी: दिन की पूँजी एक थकन है रात बहुत बेगानी है

anjun azmi famous ghazal din ki poonji ek thakan hai raat bahut begani hai
                
                                                         
                            


दिन की पूँजी एक थकन है रात बहुत बेगानी है
आईने में सूरत अपनी कुछ जानी पहचानी है

बे-मा'नी से एक सफ़र का क़िस्सा जो तूलानी है
कौन सुना जाता है मुझ को किस की राम-कहानी है

'उम्र-ए-गुरेज़ाँ से क्या लेना लम्हा लम्हा बीत गया
उस का चेहरा याद आता है याद उस की लाफ़ानी है

जानी पहचानी राहों पर हम पहले भटके लेकिन
मंज़िल शायद पास आ पहुँची राह बहुत अन-जानी है

अब्र हवा मौसम को ले कर पास तिरे आ बैठे हैं
कुछ ख़ातिर अपनी भी कर लो दो दिन की मेहमानी है

दिल ठुकरा के किस दौलत के पीछे भागे फिरते हो
दिल के सिवा जितनी दौलत है सारी आनी-जानी है

अब तक ये होता आया है आगे का मा'लूम नहीं
‘आ'ज़मी’ साहब इस कूचे में आकर जान गँवानी है

एक दिन पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर