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भास्कर शुक्ला: दरख़्तों से नदी से पंछियों से दोस्ती है

bhaskar shukla famous ghazal darakhton se nadi se panchchiyo se dosti hai
                
                                                         
                            


दरख़्तों से नदी से पंछियों से दोस्ती है
मिरी इक 'उम्र से इन जंगलों से दोस्ती है

कहीं जाऊँ मुझे ले जाएँगे तेरी तरफ़ ही
सो तेरे शहर के सब रास्तों से दोस्ती है

तिरे ग़म का असर ऐसा हुआ दिल पर हमारे
हमारी अब जहाँ भर के ग़मों से दोस्ती है

भरोसा क्या करें उन दोस्तों की दोस्ती का
भली जिन की हमारे दुश्मनों से दोस्ती है

हमारी दोस्ती के दरमियाँ कुछ भी न आया
हमारी दोस्ती बस मुद्दतों से दोस्ती है

अगर आसानियाँ हैं तो ज़रा मुश्किल रहेगी
नहीं डर मुश्किलों का मुश्किलों से दोस्ती है

ज़माने की ज़रूरत ही कहाँ है 'भास्कर' को
वो 'आशिक़ है और उस की 'आशिक़ों से दोस्ती है
 

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51 मिनट पहले

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