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Hindi Ghazal: कौन है ? किसको क़रार है भैया

उर्दू अदब
                
                                                         
                            कौन है ? किसको क़रार है भैया।
                                                                 
                            
सबके दिल में ग़ुबार है भैया ।

अश्रु बनके लहू टपकता है , 
सबके दिल में दरार है भैया ।

पेट पर, पीठ पर अजाने से , 
चाबुकों का प्रहार है भैया ।

नब्ज से कुछ पता नहीं चलता , 
हड्डियों में बुखार है भैया ।

निम्न पहले ही पिसे थे अब तो , 
बीच वालों पे मार है भैया ।

पौन महिने में चुक गया सारा , 
कितना कमती पगार है भैया। 

भाव सुरसा का मुँह हुए जाते , 
कितना ऊँचा बज़ार है भैया।

ज़िन्दगी एक है लेकिन उस पर , 
हादसे बेशुमार हैं भैया।  

नकद मिलती है यहाँ तकलीफें , 
पर खुशी तो उधार है भैया ।

व्यर्थ है  चीख इन सुरंगों में , 
कौन सुनता पुकार है भैया। 

कितना बेस्वाद अलोना जीवन , 
उस पे फीका बघार है भैया ।

कल नशे का चढ़ाव था शायद , 
आज उसका उतार है भैया ।

हर बशर करवटें बदलता है , 
क्योंकि दिल बेक़रार है भैया ।

कोई घाटी न शिखर हो जिसमें , 
सबका जीवन पत्थर है भैया ।

लोग लोगों से डर रहे हैं ज्यों , 
पास सबके कटार है भैया। 

ऐसा आतंक रोज ही हर पल , 
मौत का इंतजार है भैया ।

आज इंसान कैद है ख़ुद में , 
और खुद से फ़रार है भैया।  

आजकल रोज़-रोज़ का मरना , 
ज़िन्दगी में शुमार है भैया। 

वास्तविक जितना कुछ विकास हुआ , 
उससे ज़्यादा प्रचार है भैया । 

सबके सीनों में चितायें जलतीं , 
सबकी आँखों में धार है भैया ।

वृक्ष की जड़ से उसकी फुनगी तक , 
भ्रष्टता का प्रसार है भैया ।

जो है कुर्सीनशीन काबिल है , 
जो नहीं है, गंवार है भैया ।

क्रांतियाँ कट भी चुकी, ठूठ बचे , 
भ्रांतियों पर बहार है भैया ।

यार समझे हो तुम जिसे अपना , 
वह तो दुश्मन का यार है भैया ।

अपनी डोली ही लूट लेता है , 
जाने कैसा  कहार है भैया ।

ख़ून किस-किससे बचा पाओगे , 
शोषकों  की कतार है भैया ।

सबके सीनों में यहां सपनों का , 
टूटा - फूटा मज़ार है भैया ।

जी न लगता है कि खुशियों वाला , 
सबका उजड़ा दयार है भैया ।

पैर राहू ने जकड़ रखे हैं , 
केतु सिर पर सवार है भैया ।

प्यार कहते हैं आजकल जिसको , 
वासना का विकार है भैया ।

लोग तेजी से वृद्ध होते हैं , 
सबको चिंता अपार है भैया ।

जिसका आवा हो समूचा बिगड़ा , 
देश ऐसा कुम्हार है भैया ।

नाव निश्चित ही डूब जायेगी , 
छेद जिसमें हज़ार  है  भैया ।

बद से बदतर हुई है हालत अब , 
कौन कहता सुधार है भैया ।

आप भी कुछ तो बोलिये आख़िर , 
आपका क्या विचार है भैया । 

- चंद्रसेन विराट 

साभार: दिनेश त्रिपाठी शम्स की फेसबुक वाल से 

13 घंटे पहले

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