देखते सब है मगर चुप चुप खड़े है, कौन बोले
आज सबके होठ पर ताले पड़े हैं, कौन बोले
ओढ़कर अपने कवच अपने मुखौटे बोलने वाले
जब सुरक्षित पोल में अपनी पड़े हैं, कौन बोले
बोलते हैं वे न खुद भी जो कि कुर्सी पर विराजे
कुछ बगल में कुर्सियों की ही जड़े हैं, कौन बोले
वे भुनाने में लगे हैं खून या अपना पसीना
देश की स्वाधीनता हित जो लड़े हैं, कौन बोले
'जागते रहना' सुनाकर सो गये प्रहरी हमारे
दुश्मनों के ध्वज मुंडेरों पर गड़े हैं, कौन बोले
बोलते वे भी व जिनसे प्रश्न सारा देश करता
प्रश्न श्रेय और वे ज्यादा बड़े है, कौन बोले
बोलते हो जब सभी नवनीत कवि तेरे अलावा
व्यंग्य के ये बोल जो कटु हैं, कड़े हैं, कौन बोले
देखते सब है मगर चुप चुप खड़े है, कौन बोले
आज सबके होठ पर ताले पड़े हैं, कौन बोले
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