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हारिस बिलाल: बस एक बार फ़लक से इशारा हो जाए

haris bilal famous ghazal bas ek baar falak se ishara ho jaye
                
                                                         
                            


बस एक बार फ़लक से इशारा हो जाए
फिर उस के बा'द भले जो ख़सारा हो जाए

अजब फ़ज़ा है कि तहक़ीक़ उस पे है मौक़ूफ़
जो हो चुका है वो हम से दोबारा हो जाए

हथेलियों से हलक़ में उतरता जाम-विसाल
किसी गिलास में डालें तो खारा हो जाए

बस इतना दूर रहूँगा कि तुझ को देख सकूँ
कुछ इतना दूर कि मेरा गुज़ारा हो जाए

ये जितनी रौशनी सदियों में जज़्ब कर चुकी है
ज़मीन चाँद को ले कर सितारा हो जाए

अजब नहीं कोई तुझ सा बना दिया जाए
अजब नहीं है कि तू और प्यारा हो जाए

ये ताक़चों में रखे सब चराग़ सूरज हैं
अगर वो चाँद सा चेहरा हमारा हो जाए

7 घंटे पहले

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