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जावेद अख़्तर: अजीब बात हुई है उसे भुलाने में

javed akhtar famous ghazal misal iski kahan hai koi zamane mein
                
                                                         
                            


मिसाल इस की कहाँ है कोई ज़माने में
कि सारे खोने के ग़म पाए हम ने पाने में

वो शक्ल पिघली तो हर शय में ढल गई जैसे
अजीब बात हुई है उसे भुलाने में

जो मुंतज़िर न मिला वो तो हम हैं शर्मिंदा
कि हम ने देर लगा दी पलट के आने में

लतीफ़ था वो तख़य्युल से ख़्वाब से नाज़ुक
गँवा दिया उसे हम ने ही आज़माने में

समझ लिया था कभी इक सराब को दरिया
पर इक सुकून था हम को फ़रेब खाने में

झुका दरख़्त हवा से तो आँधियों ने कहा
ज़ियादा फ़र्क़ नहीं झुकने टूट जाने में
 

15 घंटे पहले

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