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Urdu Poetry: जो करते रहबरी उनका कोई सानी नहीं होता

उर्दू अदब
                
                                                         
                            जो करते रहबरी उनका कोई सानी नहीं होता 
                                                                 
                            
समूचे दौर में उन सा कोई दानी नहीं होता 

दिलासा का सदा पानी बरसता उनकी आंखों से 
मगर सच ये है उनकी आंख में पानी नहीं होता 

मेरे वालिद बताते हैं कि ये बगुलों के बंशज हैं 
कोई योगी यती इनसे बड़ा ध्यानी नहीं होता 

ये जब भी बोलते हैं झूठ को भी सच बताते हैं 
समूची वज्म में उनसा कोई ज्ञानी नहीं होता 

दिलों पर राज करते हैं जो अपनी बेहयाई से 
सरीखा उनके कुदरत में कोई प्राणी नहीं होता 

सियासत मुल्क की मजबूर ना करती अदालत को 
तो हरगिज रोब गद्दारों का सुल्तानी नहीं होता 

अगर फिरका परस्ती ताकतों को सह नहीं मिलता 
कभी आतंक का परचम यहां धानी नहीं होता 

~ कमलेश राजहंस 

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एक दिन पहले

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